Devata: निचृत् आर्ची बृहती
Rishi: अध्यात्म अथवा व्रात्य
Chhanda: अथर्वा
Swara: अध्यात्म प्रकरण सूक्त
Reads 51 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
अतिथिसत्कार के विधान का उपदेश।
Word-Meaning: - (यत्) जब (एनम्) इस [अतिथि] से (आह) वह [गृहस्थ] कहता है−(व्रात्य) हे व्रात्य ! [सद्व्रतधारी] (उदकम् इति) यह जल है−(तेन) उस [सत्कार] से (एव) निश्चय करके (अपः) सत्कर्म को (अव रुन्द्धे) वह [अपने लिये] सुरक्षित करता है ॥४॥
Connotation: - अतिथि को जल आदि देनेसे गृहस्थ सत्कर्मी होता है ॥४॥
Footnote: ४−(अपः) आपः कर्माख्यायां ह्रस्वो नुट् च वा। उ०४।२०८। आप्लृ व्याप्तौ-असुन् ह्रस्वश्च। कर्म-निघ० २।१। सत्कर्म। अन्यत्पूर्ववत् ॥
