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इ॒यं वा उ॑पृथि॒वी बृह॒स्पति॒र्द्यौरे॒वेन्द्रः॑ ॥

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इयम् । वै । ऊं इति । पृथिवी । बृहस्पति । द्यौ: । एव । इन्द्र: ॥१०.६॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:10» Paryayah:0» Mantra:6


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

अतिथिसत्कार की महिमा का उपदेश।

Word-Meaning: - (इयम्) यह (पृथिवी)पृथिवी [भूमि का राज्य] (वै) निश्चय करके (उ) ही (बृहस्पतिः) बड़े-बड़े प्राणियों का रक्षक गुण है, (द्यौः) प्रकाशमान राजनीति (एव) ही (इन्द्रः) परमऐश्वर्य है ॥६॥
Connotation: - मनुष्य संसार मेंअतिथि सत्कार करके और उससे शिक्षा पाके राज्यपालन से प्राणियों की रक्षा करनेकी, और राजनीति से ऐश्वर्य बढ़ाने की योग्यता पावें ॥६॥
Footnote: ६−(इयम्) दृश्यमाना (वै) (उ) (पृथिवी) भूमिराज्यम् (बृहस्पतिः) महतां प्राणिनां रक्षको गुणः (द्यौः) दिवुद्युतौ गतौ च-डिवि। प्रकाशमाना राजनीतिः (एव) (इन्द्रः) परमैश्वर्यम् ॥