Go To Mantra

स प्र॒जाप॑तिःसु॒वर्ण॑मा॒त्मन्न॑पश्य॒त्तत्प्राज॑नयत् ॥

Mantra Audio
Pad Path

स: । प्रजाऽपति: । सुऽवर्णम् । आत्मन् । अपश्यत् । तत् । प्र । अजनयत् ॥१.२॥

Atharvaveda » Kand:15» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:2


Reads 54 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमात्माऔर जीवात्मा का उपदेश अथवा सृष्टिविद्या का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) उस (प्रजापतिः)प्रजापालक [परमात्मा] ने (सुवर्णम्) सुन्दर वरणीय [स्वीकरणीय] सामर्थ्य [वासुवर्णसमान प्रकाशस्वरूप] को (आत्मन्) अपने में (अपश्यत्) देखा और (तत्) उसको (प्र अजनयत्) प्रकट किया ॥२॥
Connotation: - परमात्मा ने अपनेसृष्टिसाधक सामर्थ्य को वा अपने प्रकाशस्वरूप को विचार कर प्रकट किया ॥२॥
Footnote: २−(सः) (प्रजापतिः) प्रजापालकः परमात्मा (सुवर्णम्) कॄवृजॄसिद्रु०। उ० –३।१०। वृञ्वरणे-न प्रत्ययो नित्। सुष्ठु वरणीयं स्वीकरणीयं सामर्थ्यम्।सुवर्णवत्प्रकाशस्वरूपम् (आत्मन्) आत्मनि (अपश्यत्) (तत्) सामर्थ्यं स्वरूपं वा (प्र अजनयत्) प्रकटीकृतवान् ॥