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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
गृहआश्रम का उपदेश।
Word-Meaning: - (कृत्रिमः) शिल्पी काबनाया हुआ, (शतदन्) सौ [बहुत] दाँतोंवाला (यः एषः) जो यह (कण्टकः) काँटोंवाला [कंघा आदि] है। वह (अस्याः) इस [प्रजा अर्थात् स्त्री-पुरुषों] के (केश्यम्) केशके और (शीर्षण्यम्) शिर के (मलम्) मल को (अप अप लिखात्) सर्वथा खरोंच डाले ॥६८॥
Connotation: - जैसे शिल्पी के बनायेकंघा ककई से काढ़ने पर केश शुद्ध होते और शिर का क्लेश दूर होता है, वैसे हीअनेक प्रयत्नों से अज्ञान के मिटने पर आत्मा की शुद्धि होती है॥६८॥
Footnote: ६८−(कृत्रिमः) शिल्पिना कृतः (कण्टकः) कटि गतौ-ण्वुल् अर्शआद्यच्। कण्टकःकन्तपो वा कृन्ततेर्वा कण्टतेर्वा स्याद् गतिकर्मणः निरु० ६।३२। कण्टकयुक्तः कृन्तकः (शतदन्)छन्दसि च। पा० ५।४।१४२। दतृ इत्ययमादेशः। बहुदन्तोपेतः (यः) (एषः) (अस्याः)प्रजायाः (केश्यम्) केशे भवम् (मलम्) मालिन्यम् (शीर्षण्यम्) शिरसि भवम् (अपअप लिखात्) भृशं विलिख्य दूरीकुर्यात् ॥
