Word-Meaning: - [हे पति !] तू (ऊरुम्)जङ्घा के (आ रोह) ऊपर आ, (हस्तम्) हाथ का (उप धत्स्व) सहारा दे, और (सुमनस्यमानः)प्रसन्नचित्त होकर तू (जायाम्) पत्नी को (परि ष्वजस्व) चिपटा ले। [हे स्त्री-पुरुषो !] (इह) यहाँ [गर्भाधानक्रिया में] (मोदमानौ) हर्ष मनाते हुए तुम दोनों (प्रजाम्) सन्तान को (कृण्वाथाम्) उत्पन्न करो, (सविता) सबका उत्पन्न करनेवाला [परमेश्वर] (वाम्) तुम दोनों का (आयुः) आयु (दीर्घम्) दीर्घ (कृणोतु) करे ॥३९॥
Connotation: - पति-पत्नी दोनोंप्रसन्नवदन होकर मुख के सामने मुख, नासिका के सामने नासिका आदि अङ्गों को यथायोग्य सूधा रक्खें। पुरुष के प्रक्षिप्त वीर्य को खैंचकर स्त्री गर्भाशय मेंस्थिर करे, जिस से गर्भाधानक्रिया सफल होवे, और परमेश्वर के अनुग्रह से उत्तमसन्तान उत्पन्न करके वे दोनों अपने जीवन में प्रसन्न रहें ॥३९॥