Word-Meaning: - (इयम्) यह (शिवा)मङ्गलदायिनी (नारी) नारी [नर की पत्नी] (अस्तम्) घर में (आ अगन्) प्राप्त होवे, (धाता) सर्वपोषक [परमात्मा] ने (अस्यै) इस [वधू] को (इमम्) यह (लोकम्) लोक [समाज] (दिदेश) दिया है। (ताम्) उस [वधू] को (अर्यमा) श्रेष्ठों का मान करनेवाला [राजा], (भगः) ऐश्वर्यवान् [आचार्य], (उभा) दोनों (अश्विना) विद्या को प्राप्त [स्त्री-पुरुषों के समाज], और (प्रजापतिः) प्रजापालक [परमेश्वर] (प्रजया) उत्तमसन्तान से (वर्धयन्तु) बढ़ावें ॥१३॥
Connotation: - जब परमात्मा की कृपासे उत्तम वधू उत्तम वर को प्राप्त हो, राजा की व्यवस्था, आचार्य की शिक्षा, विद्वान् स्त्री-पुरुषों की सत्सङ्गति और परमात्मा की भक्ति से वधू-वर दोनोंगुणवान् श्रेष्ठ सन्तान उत्पन्न करें ॥१३॥