Word-Meaning: - (भगः) भगवान् [ऐश्वर्यवान् जगदीश्वर] ने (चतुरः) चार [धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष रूप] (पादान्)प्राप्तियोग्य पदार्थ (ततक्ष) रचे हैं, (भगः) भगवान् ने (चत्वारि) चार [ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास आश्रम रूप] (उष्पलानि) हिंसा सेबचानेवाले कर्म (ततक्ष) बनाये हैं। (त्वष्टा) विश्वकर्मा [परमेश्वर] ने (मध्यतः)बीच में [स्त्री-पुरुषों के भीतर] (वर्ध्रान्) वृद्धिव्यवहारों की (अनु) अनुकूल (पिपेश) व्यवस्था की है, (सा) वह [वधू] (नः) हमारेलिये (सुमङ्गली) सुमङ्गली [बड़ी आनन्द देनेवाली] (अस्तु) होवे ॥६०॥
Connotation: - परमेश्वर ने वेदोंद्वारा धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष और उनके साधन ब्रह्मचर्य आदि आश्रमों का उपदेश करके संसार के उपकार के लिये स्त्री-पुरुषों को ज्ञान और बुद्धि रूप वृद्धि कासामर्थ्य दिया है ॥६०॥