Word-Meaning: - (त्वष्टा)सूक्ष्मदर्शी [आचार्य] (बृहस्पतेः) बड़ी वेदवाणियों की रक्षिका [बृहस्पतिपदवीवाली स्त्री] के (शुभे) शुभ [आनन्द] के लिये (कवीनाम्) बुद्धिमानों की (प्रशिषा) अनुमति से (कम्) आनन्द के साथ (वासः) वस्त्र [वेष] (वि) विशेष करके (अदधात्) दिया है। (तेन) इस कारण से (सूर्याम् इव) सूर्य की चमक के समान [शोभायमान] (इमाम् नारीम्) इस नारी [नर की पत्नी] को (सविता) प्रेरक विद्वानोंका समूह (च) और (भगः) ऐश्वर्यवान् पति, दोनों (प्रजया) प्रजा [सन्तान सेवक आदि]के साथ (परि) सब ओर से (धत्ताम्) धारण करें ॥५३॥
Connotation: - जिस विदुषी स्त्री नेविद्या प्राप्त करके विद्वानों के समाज में बृहस्पति, स्नातक आदि पदवी लेकरविद्यासूचक वस्त्र अर्थात् वेष प्राप्त किया हो, विद्वान् लोग और पति उसकी सदाप्रतिष्ठा करें, जिससे वह उत्तम प्रजावाली होवे ॥५३॥