Word-Meaning: - (गावः) हे गतिशील [पुरुषार्थी कुटुम्बी लोगो !] (इह इत्) यहाँ पर ही [हम में] (असाथ) तुम रहो, (परः) दूर (न गमाथ) मत जाओ, और (इमम्) इस [पुरुष] को (प्रजया) प्रजा [पुत्र, पौत्र, सेवक आदि] से (वर्धयाथ) बढ़ाओ। (शुभम्) शुभ रीति से (यतीः) चलती हुई (उस्रियाः) निवास करनेवाली स्त्रियाँ और (सोमवर्चसः) ऐश्वर्य के साथ प्रतापवाले (विश्वे) सब (देवाः) विद्वान् लोग [अर्थात् घर के विद्वान् स्त्री-पुरुष] (वः)तुम्हारे (मनांसि) मनों को (इह) यहाँ [गृह कार्य में] (क्रन्) करें ॥३२॥
Connotation: - सब कुटुम्बी लोगपुरुषार्थ करके मिलकर धैर्य से घर में रहें और सन्तान आदि को शिक्षा दान सेबढ़ावें और सम्पत्ति और ऐश्वर्य बढ़ाकर गृहाश्रम को शोभायमान करें ॥३२॥इस मन्त्रका प्रथम पाद आ चुका है-अ० ३।८।४ ॥