Go To Mantra
Viewed 84 times

अ॑श्ली॒लात॒नूर्भ॑वति॒ रुश॑ती पा॒पया॑मु॒या। पति॒र्यद्व॒ध्वो॒ वास॑सः॒स्वमङ्ग॑मभ्यूर्णु॒ते ॥

Mantra Audio
Pad Path

अश्लीला। तनू: । भवति । रुशती । पापया । अमुया । पति: । यत् । वध्व: । वासस: । स्वम् । अङ्गम् । अभिऽऊर्णुते ॥१.२७॥

Atharvaveda » Kand:14» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:27


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

विवाह संस्कार का उपदेश।

Word-Meaning: - (रुशती) चमकता हुआ (तनूः) रूप (अमुया) उस (पापया) पाप क्रिया से (अश्लीला) अश्लील [हतश्री] (भवति)हो जाता है, (यत्) जब कि (पतिः) पति (वध्वः) वधू के (वाससः) वस्त्र से (स्वम्अङ्गम्) अपने अङ्ग को (अभ्यूर्णुते) ढक लेता है ॥२७॥
Connotation: - जब पति पुरुषार्थछोड़कर कुकामी होकर बुरी स्त्रियों के समान कुचेष्टा करता है, तब उसदुर्बलेन्द्रिय का रूप बिगड़ जाता है और वह लज्जा को प्राप्त होता है ॥२७॥यहमन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१०।८५।३० ॥
Footnote: २७−(अश्लीला) श्रीरहिता। कुरूपा (तनूः) रूपम् (भवति) (रुशती) रोचमाना (पापया) पापबुद्धया (अमुया) प्रसिद्धया (पतिः) (यत्) यदा (वध्वः) पत्न्याः (वाससः) वस्त्रात् (स्वम्) स्वकीयम् (अङ्गम्)(अभ्यूर्णुते) आच्छादयति ॥