Devata: सोम
Rishi: विवाह मन्त्र आशीष, वधुवास संस्पर्शमोचन
Chhanda: सवित्री, सूर्या
Swara: विवाह प्रकरण सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
विवाह संस्कार का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे वर !] (शामुल्यम्) [हृदय की] मलीनता (परा देहि) दूर कर दे, (ब्रह्मभ्यः) विद्वानों को (वसु) सुन्दरवस्तु (विभज) बाँट। (एषा) यह (कृत्या) कर्तव्यकुशल (जाया) पत्नी (पद्वती)ऐश्वर्यवती (भूत्वा) होकर (पतिम्) पति में (आ विशते) आकर प्रवेश करती है ॥२५॥
Connotation: - गृहपति शुद्ध अन्तःकरणसे विदुषी स्त्रियों और विद्वानों का यथावत् आदर सत्कार करे, जिन के शिक्षा आदिप्रयत्न से स्त्रीरत्न उसको मिली है ॥२५॥यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१०।८५।२९ ॥
Footnote: २५−(परा देहि) दूरं कुरु (शामुल्यम्) सानसिवर्णसिपर्णसितण्डुला०। उ०४।१०७। शमु उपशमे-उलच्, शमुलं शमलम्, अशुद्धम्, तस्य भावः−ष्यञ्।चित्तमालिन्यम् (ब्रह्मभ्यः) वेदज्ञेभ्यः (वि भज) सांहितिको दीर्घः। प्रयच्छ (वसु) श्रेष्ठं वस्तु (कृत्या) विभाषा कृवृषोः। पा० ३।१।१२०। करोतेः-क्यप्।मत्वर्थे अर्शआद्यच्। टाप्। कृत्यायां क्रियायां कुशला (एषा) (पद्वती) पतऐश्वर्ये-क्विप्, मतुप्। ऐश्वर्यवती (भूत्वा) (जाया) पत्नी (आ विशेत्) प्रविशेत् (पतिम्) पतिहृदयम् ॥
