Reads 50 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मन्त्र १-५, प्रकाश करने योग्य और प्रकाशक के विषय काउपदेश।
Word-Meaning: - (सोमेन) चन्द्रमा केसाथ (आदित्याः) सूर्य की किरणें (बलिनः) बलवान् [होती हैं] और (सोमेन) चन्द्रमा [के प्रकाश] के साथ (पृथिवी) पृथिवी (मही) बलवती अर्थात् पुष्ट [होती है]। (अथो)और भी (एषाम्) इन (नक्षत्राणाम्) चलनेवाले तारागणों के (उपस्थे) समीप में (सोमः)चन्द्रमा (आहितः) ठहराया गया है ॥२॥
Connotation: - चन्द्रमा शीतलस्वभावहै, सूर्य की किरणें उसके ऊपर गिर कर शीतल हो जाती हैं, और जब वे चन्द्रमा सेउलटकर वायु से मिलकर पृथिवी पर पड़ती हैं, तब शीतलता के कारण पृथिवी के अन्न आदिपदार्थों को पुष्ट करती हैं। इसी प्रकार सूर्य और चन्द्रमा का प्रभाव नक्षत्रोंपर होता है ॥२॥
Footnote: २−(सोमेन) चन्द्रेण सह संयुज्य (आदित्याः) आदीप्यमानाः किरणाः (बलिनः) बलं कर्तुंशीला भवन्ति (सोमेन) चन्द्रप्रकाशेन सह (पृथिवी) (मही) बलवती।पुष्टा (अथो) अपि च (नक्षत्राणाम्) गतिशीलानां तारागणानाम् (एषाम्)दृश्यमानानाम् (उपस्थे) समीपे (सोमः) चन्द्रमाः (आहितः) स्थापितः ॥
