PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
Word-Meaning: - [हे परमेश्वर] तू (उरुः) विशाल (पृथुः) विस्तृत, (सूभूः) अच्छे प्रकार वर्तमान [ईश्वर] और (भुवः) व्यापक वा शुद्ध ब्रह्म है, (इति) इस प्रकार से (वयम्) हम (त्वा उप आस्महे) तेरी उपासना करते हैं ॥५२॥
Connotation: - परमात्मा सब में विशाल सर्वशक्तिमान् आदि गुण युक्त है, ऐसा जान कर मनुष्य उसकी उपासना करें और संसार में कीर्ति बढ़ावें ॥५२॥मन्त्र ५२ और ५३ महर्षिदयानन्दकृत ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका उपासनाविषय पृष्ठ १६१, १६२ में व्याख्यात हैं ॥
Footnote: ५२−(उरुः) विशालः (पृथुः) विस्तृतः (सुभूः) सुष्ठु वर्तमानः (भुवः) भूरञ्जिभ्यां कित्। उ० ४।२१७। भू सत्तायां शुद्धौ च-असुन्, कित्, महाव्याहृतिरियम्। व्यापकं शुद्धं वा ब्रह्म। अन्यत् पूर्ववत् ॥
