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स वै दि॒ग्भ्योजा॑यत॒ तस्मा॒द्दिशोजायन्त ॥

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स: । वै । दिक्ऽभ्य: । अजायत । तस्मात् । दिश: । अजायन्त ॥७.६॥

Atharvaveda » Kand:13» Sukta:4» Paryayah:0» Mantra:34


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (सः) वह [कारणरूप ईश्वर] (वै) अवश्य (दिग्भ्यः) [कार्यरूप] दिशाओं से (अजायत) प्रकट हुआ है, (तस्मात्) उस [कारणरूप] से (दिशः) दिशाएँ (अजायत) उत्पन्न हुई हैं ॥३४॥
Connotation: - मन्त्र २९ के समान ॥३४॥
Footnote: ३४−(दिग्भ्यः) कार्यरूपाभ्यो दिशाभ्यः (दिशः) दिशाः (अजायन्त) उदपद्यन्त। अन्यद् गतम् ॥