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रोहि॑तो दिव॒मारु॑ह॒त्तप॑सा तप॒स्वी। स योनि॒मैति॒ स उ॑ जायते॒ पुनः॒ स दे॒वाना॒मधि॑पतिर्बभूव ॥

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Pad Path

रोहित: । दिवम् । आ । अरुहत् । तपसा । तपस्वी । स: । योनिम् । आ । एति । स: । ऊं इति । जायते । पुन: । स: । देवानाम् । अधिऽपति: । बभूव ॥२.२५॥

Atharvaveda » Kand:13» Sukta:2» Paryayah:0» Mantra:25


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।

Word-Meaning: - (तपस्वी) ऐश्वर्यवान् (रोहितः) सबका उत्पन्न करनेवाला [परमेश्वर] (तपसा) अपने सामर्थ्य से (दिवम्) प्रत्येक व्यवहार में (आ) सब ओर से (अरुहत्) प्रकट हुआ है। (सः) वह (योनिम्) प्रत्येक कारण [कारण के कारण] को (आ एति) प्राप्त होता है, (सः उ) वह ही (पुनः) फिर (जायते) बाहिर दीखता है, (सः) वही (देवानाम्) चलनेवाले लोकों का (अधिपतिः) बड़ा स्वामी (बभूव) हुआ है ॥२५॥
Connotation: - परमेश्वर अपने सामर्थ्य से कारणों का आदि कारण होकर और बाहिर से भी सब कार्यरूप जगत् का नियन्ता बनकर सब लोकों का स्वामी है ॥२५॥
Footnote: २५−(रोहितः) सर्वोत्पादकः परमेश्वरः (दिवम्) प्रत्येकव्यवहारम् (आ) समन्तात् (अरुहत्) प्रादुरभवत् (तपसा) स्वसामर्थ्येन (तपस्वी) ऐश्वर्यवान् (योनिम्) कारणम् (आ) समन्तात् (एति) प्राप्नोति (सः) (उ) एव (जायते) प्रादुर्भवति (पुनः) पश्चात् (सः) (देवानाम्) गन्तॄणां लोकानाम् (अधिपतिः) सर्वस्वामी (बभूव) ॥