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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
Word-Meaning: - (सूर्य) हे सूर्य ! तू (तरणिः) अन्धकार से पार करनेवाला (विश्वदर्शतः) सबका दिखानेवाला और (ज्योतिष्कृत्) [चन्द्र आदि में] प्रकाश करनेवाला (असि) है। (रोचन) हे चमकनेवाले तू (विश्वम्) सबको (आ) भले प्रकार (भासि) चमकाता है ॥१९॥
Connotation: - जैसे यह सूर्य अग्नि, बिजुली, चन्द्रमा, नक्षत्र आदि पर अपना प्रकाश डालकर उन्हें चमकीला बनाता है, वैसे ही परमात्मा अपने सामर्थ्य से सब सूर्य आदि को रचता है और वैसे ही विद्वान् लोग विद्या के प्रकाश से संसार को आनन्द देते हैं ॥१९॥इस मन्त्र पर ऋग्वेद में सायणाचार्य का लेख इस प्रकार है−“रात्रि में जलमय चन्द्र आदि बिम्बों पर सूर्य की किरणें लौटकर अन्धकार को हटाती हैं, जैसे द्वार पर रक्खे दर्पण पर गिरायी गयी सूर्य की किरणें घर के भीतर के अन्धकार को हटाती हैं ॥यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१।५०।४, यजुर्वेद ३३।३६, और सामवेद पू० ६।१४।९ ॥
Footnote: १९−(तरणिः) अन्धकारात् तारकः (विश्वदर्शतः) सर्वस्य दर्शयिता (ज्योतिष्कृत्) चन्द्रादिलोकेषु प्रकाशस्य कर्ता (असि) (सूर्य) (विश्वम्) सर्वं दृश्यमानम् (आ) समन्तात् (भासि) प्रकाशयसि (रोचन) हे प्रकाशमान ॥
