परमात्मा और जीवात्मा के विषय का उपदेश।
Word-Meaning: - (एतौ) यह दोनों [सूर्य चन्द्रमा] (पूर्वापरम्) आगे-पीछे (मायया) बुद्धि से [ईश्वरनियम से] (चरतः) विचरते हैं, (क्रीडन्तौ) खेलते हुए (शिशू) दो बालक [जैसे] (अर्णवम्) अन्तरिक्ष में (परि) सब ओर (यातः) चलते हैं। (अन्यः) एक [सूर्य] (विश्वा) सब (भुवना) भुवनों को (विचष्टे) देखता है, (अन्यम्) दूसरे [चन्द्रमा] को (हरितः) [सूर्य की] आकर्षक किरणें (हैरण्यैः) तेजोमय [वा सुनैले] कामों के द्वारा (वहन्ति) ले चलती हैं ॥११॥
Connotation: - सूर्य और चन्द्रमा ईश्वरनियम से उत्पन्न हुए हैं, तेजस्वी सूर्य प्रकाशरहित चन्द्रमा को अपने आकर्षण में रखकर प्रकाशित और उपकारी करता है, वैसे ही मनुष्य शुभ गुणों से प्रतापी होकर दूसरों को गुणवान् करें ॥११॥इस मन्त्र के प्रथम तीन पाद कुछ भेद से-ऋ० १०।८५।१८। में हैं, और पीछे-अथर्व० ७।८१।१। में आचुके हैं, और आगे-अ० १४।१।२३। में हैं ॥