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यं वातः॑ परि॒शुम्भ॑ति॒ यं वेन्द्रो॒ ब्रह्म॑ण॒स्पतिः॑। ब्रह्मे॑द्धाव॒ग्नी ई॑जाते॒ रोहि॑तस्य स्व॒र्विदः॑ ॥

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Pad Path

यम् । वात: । परिऽशुम्भति । यम् । वा । इन्द्र: । ब्रह्मण: । पति: । ब्रह्मऽइध्दौ ।अग्नी इति । ईजाते‍ इति । रोहितस्य । स्व:ऽविद: ॥१.५१॥

Atharvaveda » Kand:13» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:51


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।

Word-Meaning: - (यम्) जिस [परमेश्वर] को (वातः) पवन और (यम्) जिसको (वा) निश्चय करके (ब्रह्मणः) अन्न का (पतिः) रक्षक (इन्द्रः) मेघ (परि शुम्भति) सब ओर से प्रकाशित करता है। (ब्रह्मेद्धौ) धन के साथ प्रकाशित किये गये... मन्त्र ४९ ॥५१॥
Connotation: - आदि कारण परमात्मा के उपकारों को कार्यरूप पवन, मेघ, सूर्य, चन्द्र आदि उपकारी पदार्थों द्वारा साक्षात् करके विद्वान् लोग उन्नति करते हैं ॥५१॥
Footnote: ५१−(यम्) परमात्मानम् (वातः) पवनः (परिशुम्भति) सर्वतो दीपयति (यम्) (वा) अवधारणे (इन्द्रः) मेघः (ब्रह्मणः) अन्नस्य (पतिः) रक्षकः। अन्यत् पूर्ववत्-म० ४९ ॥