जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।
Word-Meaning: - (रोहिणी) उत्पत्तिशक्ति [प्रकृति] (इदम्) यहाँ (रोहितस्य) उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] का (सदः) प्राप्तियोग्य पद है, (असौ) वही (पन्थाः) मार्ग है, (येन) जिस से (पृषती) सींचनेवाली [प्रकृति] (याति) चलती है। (ताम्) उस [प्रकृति] को (गन्धर्वाः) पृथिवी वा जल धारण करनेवाले [मेघ] और (कश्यपाः) रस पीनेवाले [किरण] (उत् नयन्ति) ऊँचा करते हैं, (ताम्) उस [प्रकृति] को (कवयः) बुद्धिमान् लोग (अप्रमादम्) विना चूके (रक्षन्ति) पालते हैं ॥२३॥
Connotation: - प्रकृति की चाल के ज्ञान से मनुष्य परमात्मा की महिमा जानकर अनेक लाभ उठाते हैं, जैसे मेघ जल बरसाकर और किरणें जल खींचकर और प्रकाश करके प्रकृति के उत्तम गुणों को दिखाते हैं। बुद्धिमान् लोग इसी प्रकृति को निरन्तर खोजते हुए नवीन-नवीन अविष्कार करते हैं ॥२३॥