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रोहि॑तो य॒ज्ञं व्यदधाद्वि॒श्वक॑र्मणे॒ तस्मा॒त्तेजां॒स्युप॑ मे॒मान्यागुः॑। वो॒चेयं॑ ते॒ नाभिं॒ भुव॑न॒स्याधि॑ म॒ज्मनि॑ ॥

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Pad Path

रोहित: । यज्ञम् । वि । अदधात् । विश्वऽकर्मणे । तस्मात् । तेजांसि । उप । मा । इमानि। आ । अगु: । वोचेयम् । ते । नाभिम् । भुवनस्य । अधि । मज्मनि॥१.१४॥

Atharvaveda » Kand:13» Sukta:1» Paryayah:0» Mantra:14


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

जीवात्मा और परमात्मा का उपदेश।

Word-Meaning: - (रोहितः) सबके उत्पन्न करनेवाले [परमेश्वर] ने (यज्ञम्) यज्ञ [संगतियोग्य व्यवहार] को [विश्वकर्मणे] सब कामों में चतुर [मनुष्य] के लिये (वि अदधात्) उत्पन्न किया है, (तस्मात्) उस [परमेश्वर] से (इमानि) यह सब (तेजांसि) तेज (मा) मुझको (उप) समीप से (आ अगुः) प्राप्त हुए हैं। [हे परमेश्वर !] (ते) तेरे (नाभिम्) सम्बन्ध को (भुवनस्य) संसार के (मज्मनि) बल के भीतर (अधि) अधिकारपूर्वक (वोचेयम्) मैं बतलाऊँ ॥१४॥
Connotation: - परमेश्वर ने मनुष्य के हित के लिये सब श्रेष्ठ कर्म उत्पन्न किये हैं, जो विद्वान् उसकी महिमा के प्रकाश को प्रत्येक पदार्थ में देखते हैं, वे बलवान् होते हैं ॥१४॥
Footnote: १४−(रोहितः) परमेश्वरः (यज्ञम्) संगतिकरणव्यवहारम् (व्यदधात्) उत्पादितवान् (विश्वकर्मणे) सर्वकर्म्मप्रवीणाय मनुष्याय (तस्मात्) परमेश्वरात् (तेजांसि) (उप) समीपे (मा) माम् (इमानि) दृश्यमानानि (आ अगुः) प्राप्तानि अभवन् (वोचेयम्) वदेयम् (ते) तव (नाभिम्) सम्बन्धम् (भुवनस्य) संसारस्य (अधि) अधिकृत्य (मज्मनि) टुमस्जो शुद्धौ-मनिन्। मज्मना बलनाम-निघ० २।९। बले ॥