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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।
Word-Meaning: - (च) और (ओजः) पराक्रम, (च) और (तेजः) तेज [प्रगल्भता, निर्भयता], (च) और (सहः) सहन सामर्थ्य, (च) और (बलम्) बल [शरीर की दृढ़ता] (च) और (वाक्) विद्या, (च) और (इन्द्रियम्) इन्द्रिय [मन सहित पाँच ज्ञानेन्द्रिय और पाँच कर्मेन्द्रिय], (च) और (श्रीः) श्री [लक्ष्मी, सम्पत्ति, अर्थात् चक्रवर्ति राज्य की सामग्री], (च) और (धर्मः) धर्म [वेदोक्त पक्षपातरहित न्याय का आचरण] ॥७॥
Connotation: - जो राजा के कुप्रबन्ध से वेदविद्या प्रचार से रुक जाती है, अविद्या के फैलने से वह राजा और उसका राज्य सब नष्ट-भ्रष्ट हो जाता है ॥७-१०॥
Footnote: ७−(ओजः) पराक्रमः (च) समुच्चये (तेजः) प्रतापः। प्रगल्भता। निर्भयता (च) (सहः) सुखदुःखादिसहनम् (च) (बलम्) सामर्थ्यम् शरीरस्य दृढत्वम् (च) (वाक्) विद्या (च) (इन्द्रियम्) मनःसहितानि पञ्च ज्ञानेन्द्रियाणि पञ्च कर्मेन्द्रियाणि च (च) (श्रीः) लक्ष्मीः। सम्पत्तिः। चक्रवर्तिराज्यसामग्री (च) (धर्मः) वेदोक्तं पक्षपातरहितं न्यायाचरणम् (च) ॥
