Go To Mantra

अ॑स्व॒गता॒ परि॑ह्णुता ॥

Mantra Audio
Pad Path

अस्वगता । परिऽह्नुता ॥९.२॥

Atharvaveda » Kand:12» Sukta:5» Paryayah:0» Mantra:40


Reads 48 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

Word-Meaning: - (परिह्रुता) चुरा ली गयी [वेदवाणी] (अस्वगता) [वेदनिरोधक के लिये] निर्धनतारूप है ॥४०॥
Connotation: - जैसे चिता की प्रज्वलित अग्नि प्रवेश करके मृतक शरीर को भस्म कर देती है, वैसे ही वेदविरोधी अपने दुष्ट गुणों के कारण निर्धनी होकर अपने आप धूलि में मिल जाता है ॥४०, ४१॥
Footnote: ४०, ४१−(अस्वगता) स्वं धनम्। अस्व+गम−ड, भावे तल्, टाप्। अस्वं निर्धनत्वं गच्छतीति अस्वगस्तस्य भावः। निर्धनता (परिह्णुता) ह्रुङ् अपनयने=चौर्ये−क्त। चोरिता (अग्निः) प्रत्यक्षः पावकः (क्रव्यात्) मांसभक्षकः। शवदाहकः (भूत्वा) (ब्रह्मगवी) म० ५। वेदवाणी (ब्रह्मज्यम्) म० १५। ब्रह्मचारिणां हानिकरम् (प्रविश्य) (अत्ति) खादति ॥