Reads 49 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।
Word-Meaning: - (ब्रह्म) वेद [ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद] [जिस वेदवाणी का] (पदवायम्) प्राप्तियोग्य ज्ञान और (ब्राह्मणः) ब्रह्म [ब्रह्माण्ड का जाननेवाला] परमेश्वर [जिसका] (अधिपतिः) अधिपति [परम स्वामी] है ॥४॥
Connotation: - जिस वेदवाणी की प्रवृत्ति से संसार में सब प्राणी आनन्द पाते हैं, उस वेदवाणी को जो कोई अन्यायी राजा प्रचार से रोकता है, उसके राज्य में मूर्खता फैलती है और वह धर्महीन राजा संसार में निर्बल और निर्धन हो जाता है ॥१-६॥
Footnote: ४−(ब्रह्म) ऋग्यजुःसामाथर्वाख्यो वेदः (पदवायम्) पद गतौ स्थैर्ये च−अच्+वा गतिगन्धनयोः−घञ् युक् च। प्राप्तव्यं ज्ञानम् (ब्राह्मणः) ब्रह्म−अण्। ब्रह्म ब्रह्माण्डं सर्वं जगत् वेत्ति यः। सर्वसंसारज्ञः परमेश्वरः (अधिपतिः) अधिराजः ॥
