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वैरं॑ विकृ॒त्यमा॑ना॒ पौत्रा॑द्यं विभा॒ज्यमा॑ना ॥

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वैरम् । विऽकृत्यमाना । पौत्रऽआद्यम् । विऽभाज्यमाना ॥८.१॥

Atharvaveda » Kand:12» Sukta:5» Paryayah:0» Mantra:28


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।

Word-Meaning: - वह [वेदवाणी] (विकृत्यमाना) कतरी जाती हुई [वेदनिन्दक के लिये] (वैरम्) वैर [शत्रुतारूप], और (विभाज्यमाना) टुकड़े-टुकड़े की जाती हुई [उसके] (पौत्राद्यम्) पुत्र आदि सन्तानों का भक्षण [नाशरूप] होती है ॥२८॥
Connotation: - जो लोग कुमति के कारण वेदों के उत्तम गुणों को नष्ट-भ्रष्ट करते हैं, तत्त्वज्ञानी पुरुष उनके शत्रु बन जाते हैं और उनके सन्तान भी दुराचारी होकर नष्ट हो जाते हैं ॥२८॥
Footnote: २८−(वैरम्) वि विरोधे+ईर गतौ−क, वीर-अण्। विरोधः (विकृत्यमाना) विच्छिद्यमाना (पौत्राद्यम्) पौत्र+अद भक्षणे-ण्यत्। पुत्रादिभक्षणम्। सन्ताननाशनम् (विभाज्यमाना) विभागेन गृह्यमाणा ॥