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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी रोकने के दोषों का उपदेश।
Word-Meaning: - (अनुगच्छन्ती) निरन्तर चलती हुई (ब्रह्मगवी) वेदवाणी (ब्रह्मज्यस्य) ब्रह्मचारियों के हानिकारक के (प्राणान्) प्राणों को (उप दासयति) दबोच डालती है ॥२७॥
Connotation: - वेदों के निरन्तर अभ्यासी पुरुष वेदविरोधियों को अवश्य हराते हैं ॥२७॥
Footnote: २७−(अनुगच्छन्ती) अनुसरन्ती (प्राणान्) जीवनसाधनानि (उप दासयति) सर्वथा नाशयति (ब्रह्मगवी) म० ५। वेदवाणी (ब्रह्मज्यस्य) म० १५। ब्रह्मचारिणां हानिकरस्य ॥
