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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी के प्रकाश करने के श्रेष्ठ गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (च) और (वशाम्) वशा [कामनायोग्य वेदवाणी] को (वेहतम्) गर्भघातिनी स्त्री [के समान रोगिणी] (मन्यमानः) मानता हुआ (यः) जो पुरुष (अमा) अपने घर में [उसकी निन्दा] (पचते) विख्यात करता है। (बृहस्पतिः) बड़े-बड़े लोकों का स्वामी [परमेश्वर] (अस्य) उस पुरुष के (पुत्रान्) पुत्रों (च) और (पौत्रान्) पौत्रों को (अपि) भी (याचयते) भिखारी बना देता है ॥३८॥
Connotation: - जो मनुष्य वृथा दोष लगाकर वेदवाणी से अपने सन्तानों को रोकता है, वह उन्हें अविवेकी करके निर्धनी और नीच बनाता है ॥३८॥
Footnote: ३८−(यः) पुरुषः (वेहतम्) म० ३७। गर्भघातिनीस्त्रीतुल्यरोगिणीम् (मन्यमानः) जानन् सन् (अमा) गृहे (च) (पचते) पच व्यक्तीकरणे। व्यक्तीकरोति (वशाम्) कामनीयां वेदवाणीम् (अपि) एव (अस्य) (पुत्रान्) (पौत्रान्) (च) (याचयते) याचृ याच्ञायाम्, णिच्। भिक्षन् करोति। भिक्षयते ॥
