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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
वेदवाणी के प्रकाश करने के श्रेष्ठ गुणों का उपदेश।
Word-Meaning: - (देवाः) विजय चाहनेवालों ने (वशाम्) वशा [कामनायोग्य वेदवाणी] को [उस परमेश्वर से] (अयाचन्) माँगा है, (यस्मिन्) जिस [परमेश्वर] में (अग्रे) पहिले ही पहिले (अजायत) वह उत्पन्न हुई। (ताम्) उस [दूर वर्तमान] और (एताम्) इस [समीप वर्तमान वेदवाणी] को (नारदः) नारद [नीति, यथार्थ ज्ञान देनेवाला विद्वान्] (विद्यात्) जान लेवे, वह [वेदवाणी] (देवैः सह) दिव्य गुणों के सहित (उत् आजत) उदय हुई है ॥२४॥
Connotation: - परमेश्वर की वाणी वेद को विद्वानों ने भक्तिपूर्वक परमेश्वर से पाया है, उस वेदवाणी को प्रत्येक विद्वान् जानकर उसके दिव्य गुणों का प्रकाश करे ॥२४॥
Footnote: २४−(देवाः) विजिगीषवः (वशाम्) कमनीयां वेदवाणीम् (अयाचन्) याचितवन्तः परमेश्वरमिति शेषः (यस्मिन्) परमेश्वरे (अग्रे) आदौ (अजायत) प्रादुरभवत् (ताम्) दूरस्थाम् (एताम्) समीपस्थाम् (विद्यात्) जानीयात् (नारदः) म० १६। नीतिप्रदो विद्वान् (सह) (देवैः) दिव्यगुणैः (उत् आजत) अज गतिक्षेपणयोः−लङ्, आत्मनेपदं छान्दसम्। उदाजत उदयं प्रापत् ॥
