राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (यथा) जैसे (अहानि) दिन (अनुपूर्वम्) एक के पीछे एक (भवन्ति) होते रहते हैं, (यथा) जैसे (ऋतवः) ऋतुएँ (ऋतुभिः साकम्) ऋतुओं के साथ (यन्ति) चलते हैं। [वैसे ही] (यथा) जिस कारण से (अपरः) पिछला [पुत्र आदि] (पूर्वम्) पहिले [पिता आदि] को (न) न (जहाति) छोड़े, (एव) उसी कारण से, (धातः) हे विधाता ! [परमेश्वर] (एषाम्) इन के (आयूंषि) जीवनों को (कल्पय) समर्थ कर ॥२५॥
Connotation: - जैसे सूर्य आदि पदार्थ ईश्वरनियम से परिपक्व होकर दिन-राति आदि को यथानियम बनाते हैं, वैसे ही जो मनुष्य ब्रह्मचर्य आदि नियमों का यथावत् पालन करते हैं, उन के पुत्र-पौत्र आदि पूर्ण आयु भोगते हुए अपने पूर्वजों की सेवा करते रहते हैं ॥२५॥ यह मन्त्र कुछ भेद से ऋग्वेद में है−१०।१८।५ ॥