राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (शुद्धाः) [अन्तःकरण से] शुद्ध, (शुचयः) [बाहिरी आचरण से] पवित्र और (पावकाः) [दूसरों के] पवित्र करनेवाले (भवन्तः) होते हुए मनुष्य (संकसुकम्) यथावत् शासक पुरुष को (स्वस्तये) अच्छी सत्ता [कल्याण] के लिये (सम्) यथाविधि (इन्धते) प्रकाशमान करते हैं। (समिद्धः) ठीक-ठीक प्रकाशित (अग्निः) अग्नि [समान तेजस्वी पुरुष] (रिप्रम्) पाप को (जहाति) छोड़ता है, (एनः) दोष को (अति) उल्लङ्घन कर के (एति) चलता है और (सुपुना) सुन्दर शुद्धि करनेवाले कर्म से [दूसरों को] (पुनाति) शुद्ध करता है ॥११॥
Connotation: - जब धर्मात्मा विद्वान् लोग भीतर और बाहिर से अपना आचरण शुद्ध कर के मनुष्य को विद्या आदि सद्गुणों से तेजस्वी बनाते हैं, तब वे पुरुष पाप से बच कर दूसरों को शुभ मार्ग पर चलाते हैं ॥११॥