PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राज्य की रक्षा का उपदेश।
Word-Meaning: - (अहम्) मैं [मनुष्य] (सहमानः) जीतनेवाला और (भूम्याम्) भूमि पर (नाम) नाम के साथ (उत्तरः) अधिक ऊँचा (अस्मि) हूँ। मैं (अभीषाट्) विजयी, (विश्वाषाट्) सर्वविजयी और (आशामाशाम्) प्रत्येक दिशा में (विषासहिः) हरा देनेवाला (अस्मि) हूँ ॥५४॥
Connotation: - जब मनुष्य योग्यता प्राप्त करके आगे बढ़ता जाता है, तब संसार में कीर्ति बढ़ाकर सब में उच्च पद पाता है ॥५४॥
Footnote: ५४−(अहम्) मनुष्यः (अस्मि) (सहमानः) अभिभवनशीलः (उत्तरः) उच्चतरः (नाम) नाम्ना। कीर्त्या (भूम्याम्) (अभीषाट्) छन्दसि सहः। पा० ३।२।६३। षह मर्षणे−ण्वि। अन्येषामपि दृश्यते। पा० ६।३।१३७। पूर्वपदस्य दीर्घः। सहेः साडः सः। पा० ८।३।५६। इति षत्वम्। सर्वतो जेता (अस्मि) (विश्वाषाट्) पूर्ववत् सिद्धिः। सर्वजेता (आशामाशाम्) प्रतिदिशम् (विषासहिः) अ० १।२९।६। विविधजयशीलः ॥
