राजा और प्रजा के कर्त्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (अर्बुदिः) अर्बुदि [शूर सेनापति राजा] (च च) और (त्रिषन्धिः) त्रिसन्धि [तीनों कर्म, उपासना और ज्ञान में मेल अर्थात् प्रीति रखनेवाला विद्वान् पुरुष, आप दोनों] (नः) हमारे (अमित्रान्) शत्रुओं को (वि विध्यताम्) छेद डालें। (यथा) जिससे (वृत्रहन्) हे अन्धकारनाशक ! (शचीपते) वाणियों, कर्मों और बुद्धियों के पालनेवाले (इन्द्र) इन्द्र [बड़े ऐश्वर्यवाले राजन्] (एषाम्) इन (अमित्राणाम्) शत्रुओं को (सहस्रशः) सहस्र-सहस्र करके (हनाम) हम मारें ॥२३॥
Connotation: - बलवान् राजगण और त्रयी विद्या में कुशल, अर्थात् कर्म अपने कर्तव्य, उपासना ईश्वरभक्ति और ज्ञान सूक्ष्मदर्शितावाले विद्वान् जन परस्पर मिलकर शत्रुओं को हराकर प्रजापालन करें ॥२३॥