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सं॒सिचो॒ नाम॒ ते दे॒वा ये सं॑भा॒रान्त्स॒मभ॑रन्। सर्वं॑ सं॒सिच्य॒ मर्त्यं॑ दे॒वाः पुरु॑ष॒मावि॑शन् ॥

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Pad Path

सम्ऽसिच: । नाम । ते । देवा: । ये । सम्ऽभारान् । सम्ऽअभरन् । सर्वम् । सम्ऽसिच्य । मर्त्यम् । देवा: । पुरुषम् । आ । अविशन् ॥१०.१३॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:8» Paryayah:0» Mantra:13


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।

Word-Meaning: - (संसिचः) परस्पर सींचनेवाले (नाम) प्रसिद्ध (ते) वे (देवाः) दिव्य पदार्थ [पृथिवी आदि पञ्चभूत] हैं, (ये) जिन्होंने (संभारान्) [उन] संग्रहों [उपकरण द्रव्यों को] (समभरन्) मिलाकर भरा है। (देवाः) [उन] दिव्य पदार्थों ने (सर्वम्) सब (मर्त्यम्) मरणधर्मी [शरीर] को (संसिच्य) परस्पर सींचकर (पुरुषम्) पुरुष में [आत्मा सहित शरीर में] (आ अविशन्) प्रवेश किया है ॥१३॥
Connotation: - परमेश्वर के सामर्थ्य से पूर्व कल्प के समान पृथिवी, जल आदि पाँचों तत्त्व आपस में मिलाकर शरीर के इन्द्रिय आदि अवयवों को बना कर स्वयम् भी प्राणियों के शरीर में प्रवेश कर रहे हैं ॥१३॥
Footnote: १३−(संसिचः) परस्परसेचकाः सन्धायकाः (नाम) प्रसिद्धौ (ते) पूर्वोक्ताः (देवाः) दिव्यपदार्थाः पृथिव्यादिपञ्चभूतरूपाः (ये) (संभारान्) सम्+डुभृञ् धारणपोषणयोः-घञ्। संग्राहान्। उपकरणद्रव्यानि (समभरन्) एकीकृत्य धृतवन्तः (सर्वम्) (संसिच्य) परस्परमार्द्रीकृत्य (मर्त्यम्) मरणधर्माणं देहम् (देवाः) (पुरुषम्) अ० १।१६।४। सात्मकं शरीरम् (आ अविशन्) प्रविष्टवन्तः ॥