Devata: उच्छिष्टः, अध्यात्मम्
Rishi: अथर्वा
Chhanda: पुरोष्णिग्बार्हतपरानुष्टुप्
Swara: उच्छिष्ट ब्रह्म सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
Word-Meaning: - (ऐन्द्राग्नम्) इन्द्र [मेघ] और अग्नि [सूर्य, बिजुली आदि] का ज्ञान, (पावमानम्) शुद्धिकारक वायु का ज्ञान, (महानाम्नीः) बड़े नामोंवाली [वेदविद्याएँ] और (महाव्रतम्) महाव्रत और (यज्ञस्य) यज्ञ [देवपूजा, सङ्गतिकरण और दानव्यवहार] के (अङ्गानि) सब अङ्ग (उच्छिष्टे) शेष [म० १। परमात्मा] में हैं, (इव) जैसे (मातरि अन्तः) माता के [उदर के] भीतर (गर्भः) गर्भ [रहता है] ॥६॥
Connotation: - मनुष्य परमेश्वररचित पदार्थों और नियमों के ज्ञान को अपने में धारण करके वृद्धि करे, जैसे माता गर्भ को उदर में रखकर बढ़ाती है ॥६॥
Footnote: ६−(ऐन्द्राग्नम्) इन्द्राग्नि-अण्। इन्द्रस्य मेघस्य, अग्नेः सूर्यविद्युतादेश्च ज्ञानम् (पावमानम्) पवमानस्य शुद्धिकारकस्य पवनस्य ज्ञानम् (महानाम्नीः) महान्ति नामानि यासु ता महानाम्न्यः। वेदवाण्याः (महाव्रतम्) पूजनीयं व्रतम् (उच्छिष्टे) (यज्ञस्य) देवपूजासङ्गतिकरणदानव्यवहारस्य (अङ्गानि) अवयवाः (अन्तः) मध्ये (गर्भः) (इव) (मातरि) ॥
