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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब जगत् के कारण परमात्मा का उपदेश।
Word-Meaning: - (उपहव्यम्) प्राप्तियोग्य (विषुवन्तम्) व्याप्तिवाले [बाहिरी उत्तम गुण] को (च) और (ये) जो (यज्ञाः) श्रेष्ठ गुण (गुहा) बुद्धि के भीतर (हिताः) रक्खे हैं, [उनको भी] (विश्वस्य) सबका (भर्त्ता) पोषक (जनितुः) जनक [हमारे उत्पन्न करनेवाले] का (पिता) पिता [पालक] (उच्छिष्टः) शेष [म० १। परमात्मा] (बिभर्ति) धारण करता है ॥१५॥
Connotation: - मनुष्य अनादि सर्वपोषक परमेश्वर के ज्ञान द्वारा अपने बाहिरी और भीतरी गुणों का ज्ञान प्राप्त करें ॥१५॥
Footnote: १५−(उपहव्यम्) हु दानादानयोः-यत्। ग्नाह्यं गुणम् (विषुवन्तम्) व्याप्तिमन्तं विस्तारवन्तं गुणम् (ये) (च) (यज्ञाः) श्रेष्ठगुणाः (गुहा) गुहायाम्। बुद्धौ (हिताः) धृताः (बिभर्ति) धरति (भर्ता) पोषकः (विश्वस्य) सर्वस्य (उच्छिष्टः) म० १। शेषः (जनितुः) जनयितुः। जनकस्य (पिता) पालकः। जनकः ॥
