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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
कष्ट हटाने के लिये उपदेश।
Word-Meaning: - (वीरुधाम्) जड़ी-बूटियों के (सोमश्रेष्ठानि) सोम [ओषधिविशेष] को प्रधान रखनेवाले (पञ्च) पाँच [पत्ता, डण्डी, फूल-फल और जड़रूप] (राज्यानि) राज्यों का (ब्रूमः) हम कथन करते हैं। [रोगों का] (दर्भः) चीर फाड़ना, (भङ्गः) नाश़ करना, (यवः) मिलाना [भर देना] और (सहः) बल [यह उनके गुण हैं], (ते) वे (नः) हमें (अंहसः) कष्ट से (मुञ्चन्तु) छुड़ावें ॥१५॥
Connotation: - मनुष्य सोम आदि जड़ी-बूटियों के पत्ते आदि के गुणों से यथोचित उपकार लेकर रोगनिवृत्ति करके हृष्ट-पुष्ट रहें ॥१५॥
Footnote: १५−(पञ्च) पत्रकाण्डपुष्पफलमूलरूपाणि (राज्यानि) राज्ञा भिषजा नियुज्यमानानि कर्माणि (वीरुधाम्) विरोहणशीलानां लतादीनाम् (सोमश्रेष्ठानि) सोम ओषधिविशेषः श्रेष्ठः प्रशस्यतमो येषां तथाविधानि (दर्भः) दॄदलिभ्यां भः। उ० ३।१५१। दॄ विदारणे-भ प्रत्ययः। रोगविदारणगुणः (भङ्गः) भञ्जो आमर्दने-घञ्। नाशनगुणः (यवः) मिश्रणगुणः (सहः) बलम्। प्रभावः। अन्यत् पूर्ववत् ॥
