PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
प्राण की महिमा का उपदेश।
Word-Meaning: - (पुरुषः) पुरुष (गर्भे अन्तरा) गर्भ के भीतर (प्र अनति) श्वास लेता है और (अप अनति) प्रश्वास [बाहिर को श्वास] लेता है। (यदा) जब (त्वम्) तू, (प्राण) हे प्राण ! [जीवनदाता परमेश्वर] (जिन्वसि) तृप्त करता है, (अथ) तब (सः) वह [पुरुष] (पुनः) फिर (जायते) उत्पन्न होता है ॥१४॥
Connotation: - परमेश्वर के सामर्थ्य से प्राणी गर्भ के भीतर श्वास-प्रश्वास लेता और पूरे दिन होने पर उत्पन्न होता है ॥१४॥
Footnote: १४−(अपानति) प्रश्वसिति (प्राणति) प्राणव्यापारं करोति (पुरुषः) प्राणी (गर्भे) गर्भाशये (अन्तरा) मध्ये (यदा) यस्मिन्काले (त्वम्) (प्राण) हे जीवनप्रद परमेश्वर (जिन्वसि) जिवि प्रीणने। प्रीणयसि। सन्तोषयसि। तर्पयसि (अथ) तदा (सः) पुरुषः (जायते) उत्पद्यते (पुनः) पश्चात् ॥
