Go To Mantra

ओ॑द॒न ए॒वौद॒नं प्राशी॑त् ॥

Mantra Audio
Pad Path

ओदन: । एव । ओदनम् । प्र । आशीत् ॥३.३१॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:3» Paryayah:0» Mantra:31


Reads 46 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

Word-Meaning: - (ओदनः) ओदन [सुख बरसानेवाले अन्नरूप परमेश्वर] ने (एव) हि (ओदनम्) ओदन [सुखवर्षक स्थूल जगत्] को (प्र आशीत्) खाया है ॥३१॥
Connotation: - परमेश्वर अपने सामर्थ्य से सृष्टि के समय स्थूल जगत् को उत्पन्न करता और प्रलय के समय सबको सूक्ष्म कारण में लीन कर देता है। जीवात्मा के लिये स्थूल जगत् में स्थूल शरीर मुक्ति का साधन है ॥३१॥
Footnote: ३१−(ओदनः) सुखवर्षकोऽन्नरूपः परमात्मा (एव) (ओदनम्) सुखवर्षकमन्नरूपं स्थूलं जगत् (प्राशीत्) भक्षितवान् ॥