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तं त्वौ॑द॒नस्य॑ पृच्छामि॒ यो अ॑स्य महि॒मा म॒हान् ॥

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तम् । त्वा । ओदनस्य । पृच्छामि । य: । अस्य । महिमा । महान् ॥३.२२॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:3» Paryayah:0» Mantra:22


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

Word-Meaning: - [हे आचार्य !] (त्वा) तुझसे (ओदनस्य) ओदन [सुख बरसानेवाले अन्नरूप परमेश्वर] की (तम्) उस [महिमा] को (पृच्छामि) मैं पूछता हूँ, (यः) जो (अस्य) उसकी (महान्) बड़ी (महिमा) महिमा है ॥२२॥
Connotation: - जिस परमेश्वर के सामर्थ्य में सब लोक और सब दिशाएँ वर्तमान हैं, मनुष्य उसकी महिमा को खोज कर अपना सामर्थ्य बढ़ावे, म० २०-२२ ॥
Footnote: २२−(तम्) महिमानम् (त्वा) त्वामाचार्यम् (ओदनस्य) सुखवर्षकस्यान्नरूपस्य परमेश्वरस्य (पृच्छामि) अहं जिज्ञासे (यः) (अस्य) परमेश्वरस्य (महिमा) महत्त्वम् (महान्) अधिकः ॥