Go To Mantra
Viewed 72 times

बृ॒हदा॒यव॑नं रथन्त॒रं दर्विः॑ ॥

Mantra Audio
Pad Path

बृहत् । आऽयवनम् । रथम्ऽतरम् । दर्वि: ॥३.१६॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:3» Paryayah:0» Mantra:16


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।

Word-Meaning: - (बृहत्) बृहत् [बड़ा आकाश] (आयवनम्) [उस परमेश्वर का] सब ओर से मिलाने का चमचा, और (रथन्तरम्) रथन्तर [रमणीय पदार्थों द्वारा पार लगानेवाला जगत्] (दर्विः) [उसकी] डोबी [परोसने की करछी है] ॥१६॥
Connotation: - यह सब आकाश और सब जगत् परमेश्वर के लिये ऐसे छोटे पदार्थ हैं, जैसे गृहस्थ के चमचे आदि पात्र होते हैं ॥१६॥
Footnote: १६−(बृहत्) प्रवृद्धमाकाशम् (आयवनम्) आङ्+यु मिश्रणामिश्रणयोः-ल्युट्। समन्ताद् मिश्रणसाधनं चमसः (रथन्तरम्) अ० ८।१०(२)।६। रमु क्रीडायाम्−क्थन्+तॄ प्लवनतरणयोः-खच् मुम् च। रथै रमणीयैः पदार्थैस्तरति येन तज् जगत् (दर्विः) अ० ४।१४।७। दॄ विदारणे-विन्। पाकोद्धारणसाधनम् ॥