Reads 47 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सृष्टि के पदार्थों के ज्ञान का उपदेश।
Word-Meaning: - (तस्य) उस [प्रसिद्ध] (ओदनस्य) ओदन [सुख बरसानेवाले अन्नरूप परमेश्वर] का (शिरः) शिर (बृहस्पतिः) बृहस्पति [बड़े जगत् का रक्षक वायु वा मेघ] और (मुखम्) मुख (ब्रह्म) अन्न है ॥१॥
Connotation: - जैसे शरीर के लिये शिर और मुख आदि उपकारी हैं, वैसे ही परमात्मा ने अपनी सत्ता से वायु, मेघ और अन्न आदि रचकर सब संसार के साथ उपकार किया है ॥१॥
Footnote: १−(तस्य) प्रसिद्धस्य (ओदनस्य) अ० ११।१।१७। सुखवर्षकस्य परमेश्वरस्य (बृहस्पतिः) अ० १।८।२। बृहत्-पति, सुडागमः, तलोपश्च। बृहस्पतिर्बृहतः पाता वा पालयिता वा-निरु० १०।११। इति मध्यस्थानदेवतासु पाठः। बृहतो महतो जगतो रक्षिता वायुर्मेघो वा (शिरः) मस्तकम् (ब्रह्म) अन्नम्-निघ० २।७। (मुखम्) ॥
