Reads 48 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (धूमाक्षी) धुएँ भरी आँखोंवाली, (कृधुकर्णी) मन्द कानोंवाली [शत्रुसेना] (सं पततु) गिर जावे (च) और (क्रोशतु) रोवे। (त्रिषन्धेः) त्रिसन्धि [म० २ त्रयीकुशल सेनापति] की (सेनया) सेना द्वारा (जिते) जीतने पर (अरुणाः) रक्तवर्ण [डरावने रूप] वाले (केतवः) झण्डे (सन्तु) होवें ॥७॥
Connotation: - वीर सेनापति के आग्नेय आदि शस्त्रों से वैरियों की आँखें धुँधला जावें और ढोल आदि की ध्वनि से उनके कान बहरे हो जावें, इस प्रकार जीत होने पर अन्य दुष्टों को डराने को सेनापति अपनी जयपताका ऊँची करे ॥७॥
Footnote: ७−(धूमाक्षी) बहुव्रीहौ सक्थ्यक्ष्णोः स्वाङ्गात् षच्। पा० ५।४।११३। इति षच्। षित्त्वाद् ङीष्। धूमपूरितनेत्रा (सम्) सम्यक् (पततु) निपद्यताम् (कृधुकर्णी) अ० ११।९।७। मन्दश्रवणा (च) (क्रोशतु) रोदितु (त्रिषन्धेः) म० २। त्रयीकुशलस्य सेनापतेः (सेनया) (जिते) जयकर्मणि (अरुणाः) म० २। रक्तवर्णाः (सन्तु) (केतवः) ध्वजाः ॥
