Go To Mantra

स॒हस्र॑कुणपा शेतामामि॒त्री सेना॑ सम॒रे व॒धाना॑म्। विवि॑द्धा कक॒जाकृ॑ता ॥

Mantra Audio
Pad Path

सहस्रऽकुणपा । शेताम् । आमित्री । सेना । सम्ऽअरे । वधानाम् । विऽविध्दा । ककजाऽकृता ॥१२.२५॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:10» Paryayah:0» Mantra:25


Reads 44 times

PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (वधानाम्) हथियारों की (समरे) मारामार में (विविद्धा) छेद डाली गयी, (ककजाकृता) प्यास की उत्पत्ति से सतायी गयी, (सहस्रकुणपा) सहस्रों लोथोंवाली (अमित्री) वैरियों की (सेना) सेना (शेताम्) सो जावे ॥२५॥
Connotation: - वीरों की मार-धाड़ से शत्रुसेना अनेक प्रकार से व्याकुल होकर मृत्यु पावे ॥२५॥
Footnote: २५−(सहस्रकुणपा) असंख्यातशवयुक्ता (शेताम्) (आमित्री) अमित्र-अण्। शात्रवी (सेना) (समरे) युद्धे। प्रहारे (वधानाम्) आयुधानाम् (विविद्धा) विविधं ताडिता (ककजाकृता) कक+जा+कृता। कक गर्वे चापल्ये तृष्णायां च-अच्। जन जनने ड प्रत्ययो भावे, टाप्। कृञ् हिंसायाम् क, टाप्। ककस्य पिपासाया जया उत्पत्या कृता हिंसिता ॥