Go To Mantra
Viewed 89 times

क्र॒व्यादा॑नुव॒र्तय॑न्मृ॒त्युना॑ च पु॒रोहि॑तम्। त्रिष॑न्धे॒ प्रेहि॒ सेन॑या जयामित्रा॒न्प्र प॑द्यस्व ॥

Mantra Audio
Pad Path

क्रव्यऽअदा । अनुऽवर्तयन् । मृत्युना । च । पुर:ऽहितम् । त्रिऽसंधे । प्र । इहि । सेनया । जय । अमित्रान् । प्र । पद्यस्व ॥१२.१८॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:10» Paryayah:0» Mantra:18


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (त्रिषन्धे) हे त्रिसन्धि ! [म० २। त्रयीकुशल राजन्] [शत्रुओं के लिये] (क्रव्यादा) मांसभक्षक [कष्ट] (च) और (मृत्युना) मृत्यु के साथ (पुरोहितम्) पुरोहित [अग्रगामी पुरुष] का (अनुवर्तयन्) अनुवर्ती होकर तू (सेनया) अपनी सेना के साथ (प्र इहि) चढ़ाई कर, (अमित्रान्) वैरियों को (जय) जीत और (प्र पद्यस्व) आगे बढ़ ॥१८॥
Connotation: - राजा को योग्य है कि आप्त सत्य प्रतिज्ञावाले पुरुषों के समान शत्रुओं के कष्ट देने और मारने के अस्त्र-शस्त्र आदि साधन संग्रह करके चढ़ाई करे ॥१८॥
Footnote: १८−(क्रव्यादा) अ० ३।२१।८। मांसभक्षकेन कष्टेन (अनुवर्तयन्) अनुगच्छन् (मृत्युना) मृत्युसाधनेन सह (च) (पुरोहितम्) अ० ३।१९।१। अग्रगामिनं पुरुषम् (त्रिषन्धे) म० २। हे त्रयीकुशल राजन् (प्रेहि) प्रकर्षेण गच्छ (सेनया) (जय) (अमित्रान्) शत्रून् (प्र पद्यस्व) पद गतौ। अग्रे गच्छ ॥