Go To Mantra
Viewed 70 times

यदि॑ प्रे॒युर्दे॑वपु॒रा ब्रह्म॒ वर्मा॑णि चक्रि॒रे। त॑नू॒पानं॑ परि॒पाणं॑ कृण्वा॒ना यदु॑पोचि॒रे सर्वं॒ तद॑र॒सं कृ॑धि ॥

Mantra Audio
Pad Path

यदि । प्रऽईयु: । देवऽपुरा: । ब्रह्म । वर्माणि । चक्रिरे । तनूऽपानम् । परिऽपानम् । कृण्वाना: । यत् । उपऽऊचिरे । सर्वम् । तत् । अरसम् । कृधि ॥१२.१७॥

Atharvaveda » Kand:11» Sukta:10» Paryayah:0» Mantra:17


PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।

Word-Meaning: - (यदि) जो [शत्रुओं ने] (देवपुराः) राजा के नगरों पर (प्रेयुः) चढ़ाई की है, और (ब्रह्म) हमारे धन को (वर्माणि) अपने रक्षासाधन (चक्रिरे) बनाया है। (तनूपानम्) हमारे शरीर रक्षासाधन को (परिपाणम्) अपना रक्षासाधन (कृण्वानाः) बनाते हुए उन लोगों ने (यत्) जो कुछ (उपोचिरे) डींग मारी है, (तत् सर्वम्) उस सबको (अरसम्) नीरस वा फींका (कृधि) कर दे ॥१७॥
Connotation: - राजा उपद्रवी शत्रुओं को जीत कर प्रजा की सदा रक्षा करे ॥१७॥यह मन्त्र आ चुका है-अथर्व० ५।८।६ ॥
Footnote: १७−अयं मन्त्रो व्याख्यातः-अ० ५।८।६ ॥