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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
राजा और प्रजा के कर्तव्य का उपदेश।
Word-Meaning: - (आङ्गिरसः) विद्वानों के शिष्य (बृहस्पतिः) बृहस्पति [बड़े-बड़ों के रक्षक राजा] ने और (ब्रह्मसंशिताः) वेदज्ञान से तीक्ष्ण किये गये (ऋषयः) ऋषियों [धर्मदर्शकों] ने (दिवि) विजय की इच्छा में (असुरक्षयणम्) असुरनाशक (वधम्) शस्त्ररूप (त्रिषन्धिम्) त्रिसन्धि [म० २। त्रयीकुशल सेनापति] का (आ अश्रयन्) आश्रय लिया है ॥१०॥
Connotation: - सुशिक्षित राजा और विद्वानों को योग्य है कि पूर्वजों के समान धार्मिक, आस्तिक, विज्ञानी, पुरुष आश्रय लेकर विजय पावें ॥१०॥
Footnote: १०−(बृहस्पतिः) बृहतां रक्षको राजा (आङ्गिरसः) तस्येदम्। पा० ४।३।१२०। अङ्गिरस्-अण्। अङ्गिरसां विज्ञानिनां शिष्यः (ऋषयः) अ० २।६।१। सन्मार्गदर्शकाः (ब्रह्मसंशिताः) अ० ३।१९।८। शो तनूकरणे-क्त। ब्रह्मणा वेदज्ञानेन सुतीक्ष्णीकृताः (असुरक्षयणम्) दुष्टानां क्षयकरम् (वधम्) शस्त्ररूपम् (त्रिषन्धिम्) म० २। त्रयीकुशलं सेनापतिम् (दिवि) विजिगीषायाम् (आश्रयन्) श्रिञ् सेवायाम्-लङ्। आश्रितवन्तः ॥
