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क्रो॒डौ ते॑ स्तां पुरो॒डाशा॒वाज्ये॑ना॒भिघा॑रितौ। तौ प॒क्षौ दे॑वि कृ॒त्वा सा प॒क्तारं॒ दिवं॑ वह ॥

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Pad Path

क्रोडौ । ते । स्ताम् । पुरोडाशौ । आज्येन । अभिऽधारितौ । तौ । पक्षौ । देवि । कृत्वा । सा । पक्तारम् । दिवम् । वह ॥९.२५॥

Atharvaveda » Kand:10» Sukta:9» Paryayah:0» Mantra:25


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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI

वेदवाणी की महिमा का उपदेश।

Word-Meaning: - (ते) तेरी (क्रोडौ) दो गोदें (आज्येन) घी से (अभिघारितौ) चुपड़ी हुई (पुरोडाशौ) दो रोटियाँ [मुनि अन्न की पवित्र रोटियाँ] (स्ताम्) होवें। (देवि) हे देवी ! [विजयिनी वेदविद्या] (सा) सो तू (तौ) उन दोनों [गोदों] को (पक्षौ) दो पंख (कृत्वा) बनाकर (पक्तारम्) अपने पक्के [दृढ़] करनेवाले को (दिवम्) प्रकाश में (वह) पहुँचा दे ॥२५॥
Connotation: - मनुष्य वेदवाणी के एक विद्यादायक और दूसरे पुरुषार्थवर्धक गुणों को शीघ्र प्राप्त करके आत्मा को प्रकाशयुक्त करे, जैसे बालक माता की दोनों गोदों में रहकर दुग्ध आदि से शीघ्र पुष्ट होता हुआ उत्तम मार्ग पर चलता है ॥२५॥
Footnote: २५−(क्रोडौ) क्रुड बाल्ये, निमज्जने भक्षणे च-घञ्। अङ्कौ (ते) तव (स्ताम्) भवताम् (पुरोडाशौ) अ० ९।६।(१)।१२। मुन्यन्नरोटिकाविशेषौ (आज्येन) घृतेन (अभिघारितौ) घृ क्षरणे−णिच्-क्त। सर्वतः स्निग्धौ (तौ) क्रोडौ (पक्षौ) पक्षिणां पतत्रौ (देवि) हे विजयिनि (कृत्वा) (सा) सा त्वम् (पक्तारम्) पक्वकारकं दृढकारकम् (दिवम्) प्रकाशं प्रति (वह) नय ॥