Reads 58 times
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सर्प रूप दोषों के नाश का उपदेश।
Word-Meaning: - (अरंघुषः) पूरी घोषणा करनेवाले [पुरुष] ने (निमज्य) डुबकी लगाकर और (उन्मज्य) उछल कर (पुनः) फिर (अब्रवीत्) कहा।(उदप्लुतम्) जल में बही हुई (दारु इव) लकड़ी के समान (अहीनाम्) सर्पों का (उग्रम्) क्रूर (वाः) जल [अर्थात्] (विषम्) विष (अरसम्) नीरस [होवे] ॥४॥
Connotation: - विवेकी जन घोषणा देकर विचारपूर्वक शत्रुओं को ऐसा निर्बल करे, जैसे वैद्य द्वारा विष जल में बही लकड़ी के समान निकम्मा हो जाता है ॥४॥
Footnote: ४−(अरंघुषः) अलम्+घुषिर् अविशब्दने-क, लस्य रः। पर्याप्तघोषणाकारी (निमज्य) जले प्रविश्य यथा (उन्मज्य) जलादुद्गत्य यथा (पुनः) (अब्रवीत्)। अन्यत् पूर्ववत्−म० ३ ॥
