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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब सम्पत्तियों के पाने का उपदेश।
Word-Meaning: - (आयुष्मान्) उत्तम जीवनवाला, (शतशारदः) सौ वर्ष जीवनवाला (इमम्) वरणम्) वरण [स्वीकार करने योग्य वैदिक बोध वा वरना औषध] को (बिभर्मि) धारण करता हूँ। (सः) वह (मे) मेरे (राष्ट्रम्) राज्य (च) और (क्षत्रम्) क्षत्रिय धर्म को (च) और (पशून्) पशुओं (च) और (मे) मेरे (ओजः) बल को (दधत्) पुष्ट करे ॥१२॥
Connotation: - मनुष्य को योग्य है कि आत्मिक और शरीरिक बल द्वारा संसार की रक्षा करें ॥१२॥
Footnote: १२−(इमम्) प्रत्यक्षम् (बिभर्मि) धरामि (वरणम्) म० १। श्रेष्ठम् (आयुष्मान्) (शतशारदः) अ० १।३५।१। शतसंवत्सरयुक्तः (सः) वरणः (मे) मम (राष्ट्रम्) राज्यम् (च) (क्षत्रम्) क्षत्रियधर्मम् (च) (पशून्) (ओजः) बलम् (च) (मे) (दधत्) पोषयेत् ॥
