Devata: वरणमणिः, वनस्पतिः, चन्द्रमाः
Rishi: अथर्वा
Chhanda: भुरिगनुष्टुप्
Swara: सपत्नक्षयणवरणमणि सूक्त
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PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
सब सम्पत्तियों के पाने का उपदेश।
Word-Meaning: - (अयम्) यह (राजा) राजा, (देवः) दिव्य गुणवाला (वनस्पतिः) सेवनीय गुणों का रक्षक (वरणः) वरण [स्वीकार करने योग्य वैदिक बोध वा वरना औषध] (मे) मेरे (उरसि) हृदय में है। (सः) वह (मे) मेरे (शत्रून्) शत्रुओं को (वि बाधताम्) हटा देवे, (इव) जैसे (इन्द्रः) इन्द्र [बड़ा ऐश्वर्यवान् पुरुष] (असुरान्) सज्जनों के विरोधी (दस्यून्) डाकुओं को [हटाता है] ॥११॥
Connotation: - विद्वान् मनुष्य परमात्मा में श्रद्धा करके आत्मा और शरीर की उन्नति करता हुआ प्रतापी शूरों के समान शत्रुओं का नाश करे ॥११॥
Footnote: ११−(उरसि) हृदये (राजा) ऐश्वर्यवान् (शत्रून्) अरीन् (वि) विशेषेण (बाधताम्) निवारयतु (इन्द्रः) परमैश्वर्यवान् (दस्यून्) चौरान् महासाहसिकान् (इव) यथा (असुरान्) सज्जनविरोधकान् ॥
