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ब्रह्म॑णा॒ भूमि॒र्विहि॑ता॒ ब्रह्म॒ द्यौरुत्त॑रा हि॒ता। ब्रह्मे॒दमू॒र्ध्वं ति॒र्यक्चा॒न्तरि॑क्षं॒ व्यचो॑ हि॒तम् ॥
Pad Path
ब्रह्मणा । भूमि: । विऽहिता । ब्रह्म । द्यौ: । उत्ऽतरा । हिता । ब्रह्म । इदम् । ऊर्ध्वम् । तिर्यक् । च । अन्तरिक्षम् । व्यच: । हितम् ॥२.२५॥
Atharvaveda » Kand:10» Sukta:2» Paryayah:0» Mantra:25
PANDIT KSHEMKARANDAS TRIVEDI
मनुष्यशरीर की महिमा का उपदेश।
Word-Meaning: - (ब्रह्मणा) ब्रह्म [परमेश्वर] करके (भूमिः) भूमि (विहिता) सुधारी गयी है, (ब्रह्म) ब्रह्म करके (द्यौः) सूर्य (उत्तरा) ऊँचा (हिता) धरा गया है। (च) और (ब्रह्म) ब्रह्म करके (इदम्) यह (ऊर्ध्वम्) ऊँचा, (तिर्यक्) तिरछा चलनेवाला, (व्यचः) फैला हुआ (अन्तरिक्षम्) अन्तरिक्ष [आकाश] (हितम्) धरा गया है ॥२५॥
Connotation: - ब्रह्म परमेश्वर ने सब ऊँचे, नीचे और मध्यलोक बनाये हैं ॥२५॥
Footnote: २५−(ब्रह्मणा) परमेश्वरेण (ब्रह्म) म० २३। ब्रह्मणा। अन्यत् पूर्ववत् मन्त्रे २४ ॥
